Dr. Rahat Indori Shayari in Hindi-Best Shayari

Best Dr. Rahat Indori Shayari in Hindi

Dr. Rahat Indori Shyari in Hindi: दोस्तों, अगर किसी को शायरी पसंद हो और वह Dr. Rahati Indori को न जानता हो ये तो हो नहीं सकता। क्योकि Dr. Rahat Indori साहब ने शायरी, कविता और गजल की दुनिया में इतना नाम कमाया कि एक इन्सान के लिए बहुत मुश्किल है और ये पहचान इनको विरासत में ऐसे ही नहीं मिली है। ये पहचान इन्होने अपने आप बनाई थी। राहत इंदौरी वो प्रसिद्ध कलाकार थे जो अपने ही बनाये अंदाज़ में झूमकर ग़ज़ल गायन को बखूबी अंदाज़ में बयां करते थे। Dr. Rahat Indori Shayari in Hindi डॉ राहत इंदौरी के द्वारा लिखी गयी हर ग़ज़ल, हर लफ्ज़ के साथ मोहब्बत की नयी शुरुआत करती हैं।

उर्दू भाषा के विशव प्रसिद्ध शायर Dr. Rahat Indori हमारे समय के सबसे प्रतिष्ठित कवि, शायर और हिंदी फिल्म गीतकार में से एक थे । इसके अलावा, वे हिंदी दुनिया के प्रमुख गीतकारों में से एक थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1950 को मध्य प्रदेश के इंदौर में हुआ था। उनके पिता का नाम रफतुल्लाह कुरैशी और माता का नाम मकबूल उन निशा बेगम था। उन्होंने मध्य प्रदेश के भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। कोरोना से जंग के दौरान उनका निधन हो गया था।

तो आये दोस्तों Dr. Rahat Indori के कहे हुए कुछ प्रसिद्ध शायरी कविता और गजलें को पढ़ते है–


Dr. Rahat Indori Shayari Image

Dr. Rahat Indori Shayari
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Rahat Indori Ghazal
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Dr. Rahat Indori Shayari, “बुलाती है मगर जाने का नहीं”

“बुलाती है, मगर जाने का नहीं,
ये दुनिया है, इधर जाने का नहीं!!

मेरे बेटे.. किसी से इश्क़ कर,
मगर हद से गुज़र जाने का नहीं!!

ज़मीं भी सर पे रखनी हो तो रखो,
चले हो तो ठहर जाने का नहीं!!

सितारे नोच कर ले जाऊंगा
मैं, खाली हाथ घर जाने का नहीं!!

वबा फैली हुई है हर तरफ,
अभी माहौल मर जाने का नहीं!!

वो गर्दन नापता है, नाप ले…
मगर जालिम से डर जाने का नहीं!!”


Rahat Indori Romantic Shayari in HIndi
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Dr. Rahat Indori Shayari in Hindi

“हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं
मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं”


“मौसमो का ख़याल रखा करो
कुछ लहू मैं उबाल रखा करो
लाख सूरज से दोस्ताना हो
चंद जुगनू भी पाल रखा करो”


“आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो
आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो”


“इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए
तेरे हाथों में तो ये कंगन भी ढीले हो गए
फूल बेचारे अकेले रह गए है शाख पर
गाँव की सब तितलियों के हाथ पीले हो गए”


“लवे दीयों की हवा में उछालते रहना
गुलो के रंग पे तेजाब डालते रहना
में नूर बन के ज़माने में फ़ैल जाऊँगा
तुम आफताब में कीड़े निकालते रहना”


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“इस दुनिया ने मेरी वफ़ा का कितना ऊँचा मोल दिया
बातों के तेजाब में, मेरे मन का अमृत घोल दिया
जब भी कोई इनाम मिला हैं, मेरा नाम तक भूल गए
जब भी कोई इलज़ाम लगा हैं, मुझ पर लाकर ढोल दिया”


“जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए
दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए”


“जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से
फूल इस बार खिले हैं बड़ी तैयारी से
बादशाहों से भी फेके हुए सिक्के ना लिए
हमने खैरात भी मांगी है तो खुद्दारी से”


“जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं
अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं..”

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“तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो”


“ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे
जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे”


“आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो”


“हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे,
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते!!”


“अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं,
पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं||”


“अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे”


“जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे
मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे”


“फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो”


“आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो”

“उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है
बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं”


“बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं”


“किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है
आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है”

“ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था”


“मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना
मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था”

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“बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए”


“मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया
इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए”


“शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे”


“सूरज सितारे चाँद मिरे सात में रहे
जब तक तुम्हारे हात मिरे हात में रहे”


“कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है”


“दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए”


“वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया”


“ये हवाएँ उड़ न जाएँ ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो”


“ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मे यारी रखो”


“हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते”


“एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो”


“घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है”

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